सुरक्षित समाज निर्माण का संकल्प

हमारा समाज उन्नति कर रहा है, या पिछड़ रहा है…. यह सवाल मेरे मन में लगातार घुमड़ता रहता है, 100 दिन पहले मैंने केडी सिंह फाउंडेशन के तहत दुष्कर्म पीड़ितों की मदद के लिए “रेप सेल” का गठन किया था, तब से लगातार दुष्कर्म की घटनाओं से रोज पाला पड़ता है, और इस मामले से जुड़ी गवाही और केस में बेवजह देरी बेचैन कर देती है। मैं दुष्कर्म जैसे अपराधों की परत दर परत गहरी से पड़ताल के पक्ष में हूं। मैं पूछता हूं कि “क्या किसी को इसतरह से किसी के साथ बर्बर व्यवहार करने का हक है ?” व्यक्तिगत तौर पर मैं बहुत आशावादी व्यक्ति हूं और मैं आशा करता हूं कि केडी सिंह टीम भी मेरी तरह ही बदलाव के प्रति आशावान है। मैं इस जघन्य और घृणित अपराध के मूल को जानने के लिए प्रयासरत हूं। हम आशा करते हैं कि इस अपराध को हम पूरी तरह से खत्म करने में सफल न भी हो, तो भी आने वाले दिनों में हम इसे कम करने में कामयाब होंगे। मुझे पूर्ण विश्वास है कि केडी सिंह फाउंडेशन अपने अथक प्रयास और लगातार दुष्कर्म पीड़ितों की सहायता कर, इस विचार को साकार करेगी।

 

अभी हाल ही में एक घटना सामने आई, एक 4 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया गया था, भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि ऐन मौके पर बच्ची की मां पहुंच गई और अपनी बेटी को बचा लिया। यह मामला हरियाणा के पानीपत जिले के एक छोटे से गांव का है। एक 4 साल की बच्ची अपनी मां के साथ स्कूल से घर लौटी थी, पांच मिनट के लिए मां बच्ची से दूर हुई, इतने में पड़ोसी ने बच्ची को उठा लिया। वह अपने नापाक इरादों को अंजाम देने ही वाला था कि इतने में बच्ची की मां वहां पहुंच गई और अपनी बेटी को बचा लिया। अगर दुर्भाग्य से मां सही समय पर नहीं पहुंचती तो उस 4 साल की बच्ची के साथ पड़ोसी अपने नापाक इरादों में कामयाब हो जाता।

 

इस तरह की घटनाएं कल्पना से परे हैं, ऐसी घटनाओं पर किसी को भी गुस्सा आ सकता है। खासकर तब जब महिला का पति खुद सारे मामले को रफा दफा करने की सिफारिस कर रहा हो, तर्क दे रहा हो कि आरोपी पक्ष ताकतवर और प्रभावशाली है और उनके खिलाफ लड़ाई लड़ना आसान नहीं होगा। ऐसे में बेबस मां का गुस्सा और बेबसी हताशा का रुप धारण कर लेती है। ऐसे में उसे अपनी बेटी के लिए न्याय पाने की एक ही उम्मीद, केडी सिंह फाउंडेशन के रुप में दिखाई देती है। और वो बेबस मां फाउंडेशन से संपर्क करती है।

 

हमेशा की तरह इस बार भी फाउंडेशन की टीम बिना देरी किए पीड़ित और उसके परिवार के पास पहुंचती है। पूछताछ के दौरान टीम को पता चलता है कि बच्ची की मां के साथ भी दुष्कर्म हुआ था। उस समय उसके मां बाप ने उसे चुप रहने के लिए कहा था। लेकिन आज वो अपनी बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म को बर्दाश्त नहीं करना चाहती। वो अपनी बच्ची के साथ हुए अन्याय के खिलाफ लड़ना चाहती है, और उसे न्याय दिलाना चाहती है। महिला का दृढ़ संकल्प और अपनी बच्ची को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता हमारी टीम के लिए प्रेरणा है। आखिर उनका संकल्प ही हमारी ताकत है, और महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज निर्माण की संभावनाओं का आधारशिला है।

 

उसी दिन केडी सिंह फाउंडेशन की टीम ने एक वकील नियुक्त किया। जिससे पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानूनी तरीके से आगे बढ़ा जा सके। हम पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कृतसंकल्प है और उसे जरूरी शिक्षा दिलाने के लिए प्रतिबद्द हैं।

 

हमारी प्रतिबद्धता ही हमारी प्रेरणा है

 

जय हिन्द…

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