शिक्षा के बदले मिली मौत

बिहार में 20 बच्चों की मौत का समाचार सुनकर दुख हुआ, इन बच्चों को मिड डे मील के अन्तर्गत दोपहर का भोजन दिया गया था, जो इनके लिए जहर साबित हुआ।

ऐसी घटनाएंविचलित कर देती हैं। बेचैन मन में ढ़ेरों सवाल उठने लगते हैं। क्यों किसी की लापरवाही की कीमत इन मासूम बच्चों को अपनी मौत से चुकानी पड़ी। बच्चे कल का भविष्य है, शिक्षा से प्रगति संभव है…क्या ये सब बातें किताबी हैं?, भाषणबाजी है? क्या हम अभी भी इतने सक्षम नहीं हुए हैं कि अपने बच्चों की सही तरीके से देखभाल कर सकें?, उनके पढ़ने लिखने की सही और सुरक्षित तरीके से व्यवस्था कर सकें? जो भी है यह घटना बेहद दुखद और दिल को दहलाने वाली है। इस घटना की जिम्मेदारी से राज्य और जिला प्रशासन अपना मुंह नहीं मोड़ सकती। उसे जिम्मेदारी लेनी होगी। उसे जवाब देना होगा। केवल जांच का आदेश देना या मुआवजा की घोषणा करना ही पर्याप्त नहीं है। उसे ठोस कदम उठाना होगा, मासूमों की मौत के दोषियों को सजा देनी होगी।

मिड डेमील योजना शिक्षा केप्रसार केमकसद सेशुरूकिया गया है, इसके पीछेसोच हैकि गरीब और अतिगरीब परिवार का बच्चा भी पढ़ लिख सके। इसके लिए स्कूल परिसर में ही शिक्षा के साथ दोपहर के आहार की व्यवस्था की गई है। बिहार के सारण जिले के जजौली पंचायत स्थित धर्मसती प्राइमरी स्कूल में बच्चों को दोपहर का खाना परोसा गया, जो उनके लिए जहर साबित हुआ। इस जहरीले भोजन से 20 बच्चों की मौत हो गई और करीब 38 बच्चे छपरा जिले के अस्पताल में भर्ती हैं। अब जरा गौर से सोचिए कि इस घटना के बाद कौन सा परिवार अपने बच्चे को स्कूल भेजना चाहेगा! जबकि वैसे ही देश में शिक्षा का स्तर बहुत अच्छा नहीं है। बिहार में तो हालत और भी बदतर है, राज्य में अभी भी शिक्षा दर 68.82% प्रतिशत के करीब हैं, और अगर इसतरह की घटनाएं आगे भी होतीं रहीं तो बहुत बड़ा तबका अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराएगा। कौन मां-बाप अपने लाड़ले/लाडली के लिए ऐसी शिक्षा चाहेगा।

ऐसा नहीं कि मिड डेमील के विषाक्त हो जाने की यह पहली घटना है, लेकिन सबक नहीं लिया जाता। हालात से समझौता कर लिया जाता है। जिससे दोषियों के हौसले बुलंद होते हैं, और कीमत निरीह बच्चों को चुकानी पड़ती है। हमारा देश लोकतांत्रिक है। शिक्षा हमारा मूल अधिकार है। सुरक्षित और गुणवत्तायुक्त शिक्षा की व्यवस्था करना राज्य का काम है। शिक्षा प्रगति का आधार है, सभ्य, सुसंस्कृत समाज की नींव है, ऐसे में अगर राज्य शिक्षा के प्रति उदासीन रहेगा तो कल का भारत निर्माण किसके बलबूते होगा। #KD SinghFoundation व्यक्तिगत रूप से मासूम बच्चों की मौत पर हार्दिक संवेदना व्यक्त करती  है, और परमपिता सर्वशक्तिमान ईश्वर से प्रार्थना करती  है कि अभिभावकों को इस दुखद घड़ी में सहनशक्ति दे…

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