बर्बरता के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला

दोस्तों…… आज साकेत कोर्ट पर देशभर की नजरें लगी थी, 16 दिसम्बर की रात को चलती बस में 23 वर्षीय पारामेडिकल छात्रा से गैंग रेप हुआ था, इस मामले में  अदालत ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई… यह मामले कोर्ट की नजर में दुर्लभतम मामलों में से एक था। कोर्ट के फैसले का असर असामाजिक तत्वों पर कितना पड़ेगा???? महिलाओं पर होने वाले हमलों में कमी आयेगी या नहीं? ढ़ेरों सवाल हैं….जिनका जवाब अभी मिलना है…

लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर दुष्कर्म क्यों होते हैं??? दुष्कर्म की प्रेरणा अपराधियों को कहाँ से मिलती है???? इसके जिम्मेदार व्यक्तियों की मानसिकता क्या होती है???? जबकि दुष्कर्म अपने आपमें एक ऐसा जघन्य अपराध है, जिससे केवल पीड़ित महिला ही नहीं, उससे जुड़ा हर शख्स मानसिक तनाव से गुजरता है, उसके दिलोदिमांग पर जो   गहरी चोट पहुंचती है, जो आघात होता है, उसकी छवि लंबे समय तक उसके व्यक्तित्व पर देखी जा सकती है, उसे जो मानसिक क्षति पहुंचती है, उसको आंका नहीं सकता। जबकि दुष्कर्मी बेखौफ होकर समाज में घूमते रहते हैं, पीड़िता और उसके परिवार को धमकाते, डराते हैं, ऐसे हालत में आरोपी को कभी सजा हो जाता है, तो कभी वो कानूनी दांवपेच कर बच निकलते हैं, इससे उनके हौसले बुलंद होते हैं ।

16 दिसम्बर की वारदात को शायद ही कोई भूल सकता है, निर्भया के साथ जो बर्बरता हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया। विकसित और आधुनिक दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए। दुखः की बात है कि 16 दिसम्बर के बाद भी देश में महिलाओं के खिलाफ हमलों में बढ़ोत्तरी हुई है। कानून कड़े हुए, लेकिन अपराधियों को  कानून का कोई डर नहीं। साकेत कोर्ट का फैसला दुष्कर्म के खिलाफ लड़ाई लड़ने वालों के लिए उम्मीद की एक किरण है, आशा की जानी चाहिए कि दुष्कर्म के अन्य मामलों में भी पीड़िता को न्याय मिलेगा।

मैं और मेरी केडीसिंहफाउंडेशन की टीम साकेत कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि महिलाओं के लिए सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए की गई पहल आगे भी जारी रहेगी, जिससे देश को महिलाओं के लिए पूर्णरुप से सुरक्षित बनाया जा सके।

जय हिन्द…

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