मुजफ्फरनगर में जल्द से जल्द शांति बहाली हो

दोस्तों… मुजफ्फरनगर के हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं, लापता लोगों की संख्या सैंकड़ों के पार पहुँच चुकी है, मरने वालों और घायलों की संख्या में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। हालात इतने बदतर हो चुकें हैं कि लोगों को अपनी जान बचानी भारी पड़ रही है, गांवों में हालात और खराब हैं। सामाजिक ताना बाना ध्वस्त हो चुका है, लोग अपने घरों को छोड़ कैंपों में रहने को मजबूर हैं। दो समुदायों के बीच का आपसी भाईचारा और विश्वास खत्म हो चुका है।

मैं दंगे में नेताओं की भूमिका को लेकर चिन्तित हूं। जिन नेताओं, जनप्रतिनिधियों, समाज सेवकों पर समाज में शान्ति और सुरक्षा को बनाए रखने का दायित्व था, उन्होंने निहित स्वार्थों से प्रेरित होकर राज्य में सुनियोजित तरीके से आमलोगों को भड़काया। दो समुदायों के बीच गहरी खाई खोद दी। मुजफ्फरनगर की भोलीभाली जनता इनके स्वार्थ की कीमत चुका रही है। इस दंगे में अभी तक 48 लोगों की मौत हो चुकी हैं और सैकड़ों लोग लापता हैं।

लोग नाउम्मीद हैं, दंगा पीड़ित मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सियासतदां राजनीतिक रोटियां सेंकने में लगे हैं, पहली बार दंगे की आंच में गांव झुलस रहा है, अभी तक गांवों में कोई मदद नहीं पहुंची है, ऐसे में लाचार किसान अपनी बर्बादी देखने को मजबूर हैं। मुजफ्फरनगर की 40 प्रतिशत आबादी किसानों की है, धर्म के नाम पर उनके बीच नफरत के बीज बो दिए गए हैं, स्वार्थी तत्व राजनीतिक फसल की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जिससे चुनाव में वोटों की बरसात हो सके।

मैं आशा करता हूँ कि राज्य सरकार मुजफ्फरनगर में हालात सामान्य करने के लिए कठोर कदम उठाएगी जिससे मुजफ्फरनगर में शांति बहाली हो सके। साथ ही दंगें के लिए जिम्मेदार लोगों को तत्काल गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए….

जय हिन्द…

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